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About Bahi Parshwanath Mandir, Mandsaur(M.P.)

क्षेत्र परिचय
यह क्षेत्र 1990 मे आचार्य कल्याण सागर जी महाराज की प्रेरणा से क्षेत्र का मन्दिर निर्माण प्रारम्भ हुआ! 2001 मे मन्दिर की पंच कल्याण प्रतिष्टा हुई! यह समय समय पर साधु संतो का आवागमन होता रहता है! परम पुज्य 108 ब्रम्हानन्द सागर जी का वर्षायोग हुआ है मे एवं 2010 2008! यहाँ दर्शन, अभिषेक, पुजन, विधान स्वाध्याय प्रतिदिन होती है! यहाँ त्यागी व्रति एवं श्रावक धर्म साधना करते है! जो भी त्यागी व्रति श्रावक यहाँ रहकर धर्म साधना एवं स्वास्थ्य लाभ करना चाहे उनके लिये क्षेत्र पर विशेष सुविधा है! यह क्षेत्र प्रक्रतिक सौन्दर्य का अनुपम स्थान है! 22 बीगा भुमी पर यह विशाल क्षेत्र है!

ऐतिहासिकता-
इस स्थान पर आचर्य 108 श्री कल्याणसागर जी म. सा. का समाधि स्थल है ! जहां पर णमोकार महामंत्र का जाप करने पर बडा आनन्द प्राप्त होता है !

Inspirational Testimony

समीपवर्ती तीर्थ स्थल -
प्रतापगढ - 35 किमी. , धमोतर शांतिनाथ - 40 किमी.,
देवगढ - 50 किमी. धरियावद - 70 किमी. ये सभी तीर्थ राजस्थान मे है !

तीर्थ दर्शन -
* दि. जैन पार्श्वनाथ जिनालय
* चौबीसी दर्शन
* मान स्तम्भ दर्शन
* सम्मेद शिखर रचना
* सोनागिरी व गिरनार पर्वत रचना
* 1008 आदिनाथ समवशरण मंदिर
* आदिनाथ, भरत, बाहुबली दर्शन
* ध्यान केंद्र 1008 आदिनाथ जिनालय
* 108 आचार्य श्री कल्याणसागर समाधि
* संत निवास एवं त्यागी व्रती आहार कक्ष
* दि. जैन हायर सेकण्ड्री स्कूल
* यात्री विश्राम गृह एवं धर्मशाला